Loading...

‘आज़ाद हिन्द फ़ौज’ का सिपाही, आज क्यों मजबूर है करने को यह काम, देखिये

क्या कभी आपने यह सोचा है कि जिन्होंने अपनी जान की परवाह ना करते हुए देश को आज़ाद कराया, उनमें से जो जिंदा हैं, वो किस हाल में हैं ?आज हम आज़ादी का मजा लेते हुए अपने घरों में बड़े-बड़े मुद्दों को बड़ी आसानी से बहस में उड़ा देते है,

सरकार के साथ-साथ समाज की भी जिम्मेदारी बनती है, कि जिनकी वजह से वो आज़ादी में जी रहे हैं, उन्हें उनकी सही जगह मिले l सोचियेगा जरूर !

loading...

ये हैं झाँसी के रहने वाले श्रीपत जी, 90 साल से भी ज्यादा की उम्र पार कर चुके श्रीपत जी झाँसी में दिए गये नेताजी सुभाषचंद्र बोस जी के भाषण से प्रभावित होकर आज़ाद हिन्द सेना में शामिल हुए थे l श्रीपत जी अपनी जान की परवाह किये बिना देश की आज़ादी के लिए लड़े, देश तो आज़ाद हो गया, लेकिन वो खुद हालातों के हाथों गुलाम हो गये, और गुलाम भी ऐसे हुए कि आज उन्हें अपनी जिंदगी गुजारने के लिए भीख तक मांगनी पड़ रही है l

बेटे की ऐसी करतूत, भीख मांगने को किया मजबूर

ऐसा नही है कि स्वतंत्रता सेनानी श्रीपत के हालात पहले से ही खराब थे, उनके पास झाँसी में 7 एकड़ जमीन, और एक लाइसेंसी बन्दूक भी थी, इनकी ज़िन्दगी अच्छी चल रही थी, लेकिन किस्मत ने पलटी मारी और आज़ाद हिन्द फ़ौज के इस सिपाही को दर-दर भटकने पर मजबूर कर दिया l कभी देश के लिए लड़ने वाला ये सिपाही आज जिंदगी की तमाम परेशानियों से जूझ रहा है l

श्रीपत जी आजकल अपनी पत्नी के साथ हंसारी में एक झोपड़ी में रहतें हैं l ऐसा नही है कि आज़ादी की लड़ाई लड़ने वाले सेनानियों में सिर्फ यही अकेले हैं, ऐसे और बहुत से उदाहरण हैं हमारे देश में, जिन्होंने देश के लिए अपना सब कुछ लुटा दिया, लेकिन सुध लेने वाला कोई नही l

श्रीपत के बेटे तुलसिया को नशे और जुए की ऐसी लत लगी, जिसने अच्छी खासी चल रही जिंदगी को तबाह कर दिया l जुए और नशे की लत में तुलसिया 7 एकड़ जमीन के साथ-साथ सब कुछ बेचता चला गया, और धीरे धीरे ये परिवार कंगाल होता गया l श्रीपत ने तुलसिया को नशे से दूर रखने के लिए काफी उपाय किए, लेकिन तुलसिया नशें और जुए में ऐसा डूबा, जिसका नतीजा पूरे परिवार को भुगतना पड़ रहा है l जब तक हाथ-पैर काम कर रहे थे, तब तक खेतों में मजदूरी करते रहे, लेकिन जब शरीर से भी असमर्थ हो गये, तब असहाय होकर आज आज़ाद हिन्द फौज का ये सिपाही अपनी जिंदगी गुजारने के लिए दर-दर भटकते हुए भीख मांगने पर मजबूर हो गया l

मरते दम तक देश के लिए काम आ सकूँ

श्रीपत कहते हैं कि मेरी हालत जो भी हो, लेकिन मरते दम तक मेरी इच्छा यही रहेगी कि मैं अपने देश के काम आ सकूँ l मेरा सौभाग्य था कि मैं नेताजी के साथ उनकी सेना में शामिल होकर देश के लिए लड़ सका l

अगले पेज पर पढ़ें आज़ादी का एक और सिपाही, जिसे जिंदा रहने के लिए मांगनी पड़ती है भीख

Loading...
loading...