नोटबंदी के बाद से आतंकवाद में आई इतने प्रतिशत की गिरावट !

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कालेधन और आतंकवाद के खिलाफ जंग में भारत को बड़ी सफलता मिलती दिख रही है। 8 नवंबर को प्रधानमंत्री मोदी ने आतंकवाद, कालेधन और जाली नोटों पर रोक लगाने के लिए नोटबंदी का फैसला लिया। इस फैसले के बाद से पाकिस्तान में जाली नोट छापने वाली दो बड़ी प्रेस कारखाने बंद हुए। साथ ही घाटी समेत देश के दूसरे हिस्सों में आतंकवाद की घटनाओं में भी गिरावट दर्ज हुई।

ऐसे सुधर रहे कश्मीर के हालात

नोटबंदी के फैसले का राष्ट्रीय सुरक्षा पर पड़ने वाले असर की जांच कर रही जांच एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार के साथ साझा की। एजेंसियों की रिपोर्ट के मुताबिक आतंकी जहां पहले स्थानीय लोगों को पैसों का लालच देकर उनसे मुखबिरी कराते थे वहीं नोटबंद होने से वो लोगों को पैसे नहीं दे पा रहे हैं और लोग उनका साथ नहीं दे रहे हैं। इसके चलते वे सुरक्षा बलों के सामने घुटने टेंकने को मजबूर हो रहे हैं। नोटबंदी के बाद कानून व्यवस्था की स्थिति सुधरने की वजह से घाटी में 10वीं और 12वीं की परीक्षा में 98 फीसदी छात्र छात्राओं ने हिस्सा लिया।

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आतंकियों की कोशिशें हो रही हैं नाकाम

नोटबंदी से आतंकियों को हथियारों की खरीद सहित अपना तंत्र संचालित करने में कई दिक्कतें हो रही हैं। पैसों की कमी से उनका जमीनी नेटवर्क टूट रहा है। इसकी वजह से बड़ी संख्या में आतंकी सुरक्षा बलों के हाथों मारे जा रहे हैं। पूर्वोत्तर में उग्रवादी गुटों के लोग सीमा पार सुरक्षित स्थान की तलाश में भाग रहे हैं। हवाला कारोबार पर नोटबंदी की करारी मार पड़ी है। भारत में हवाला कारोबारियों द्वारा हवाला कारोबार के लिए किया जाने वाला संपर्क 50 फीसदी तक गिरा है।

आगे पढ़ें, विदेशों में पैसे भेजने में कितनी गिरावट आई ?

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